गुरु सम दाता नाही जगत के माही लिरिक्स | Guru Bhajan in Hindi | Manohar Parsoya Bhakti Song
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Contents
- 1 गुरु सम दाता नाही जगत के माही लिरिक्स (हिन्दी)
- 2 गुरु सम दाता नाही जगत के माही Video | Watch on YouTube
Guru Sam Data Nahi Jagat Ke Mahi एक अत्यंत प्रेरणादायक गुरु भजन है जिसे मनोहर परसोया ने स्वरबद्ध किया है। यह भजन गुरु की महिमा, उसकी कृपा, और संसार में गुरु की तुलना न होने वाले दाता के रूप में वर्णन करता है। यदि आप आत्मिक उन्नति, मोक्ष की कामना, या सच्चे ज्ञान की खोज में हैं, तो यह भजन आपके हृदय को छू लेगा।
गुरु सम दाता नाही जगत के माही लिरिक्स (हिन्दी)
गुरु सम दाता नाही जगत के माही,
मैंने देखा खूब विचार झूठ रति नाहीं।।
पढ़ो चाहे वेद पुराण लिखी रघुराई,
सतगुरु की महिमा भागवत से अधिकाई।।
करो चाहे दान अपार तीर्थ सब नहाई,
सतगुरु बिन होवे ना मोक्ष भरम नहीं जाई।।
महा मुनि सुखदेव नारद की भाई,
सतगुरु बिन अटकी नाव भंवर के माही।।
गुरु बिन बहू दुःख मिटे जीव का नाहीं,
पद गावे जीवाराम मगन मन माही।।
गुरु सम दाता नाही जगत के माही,
मैंने देखा खूब विचार झूठ रति नाहीं।।
गायक: मनोहर परसोया, किशनगढ़
गुरु सम दाता नाही जगत के माही Video | Watch on YouTube
नीचे दिए गए वीडियो में इस सुंदर भक्ति गीत का आनंद लें:
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