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Shri Santoshi Mata Chalisa

• Updated: Dec 29, 2018
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॥ श्री सन्तोषी माता चालीसा ॥ दोहा बन्दौं सन्तोषी चरण रिद्धि-सिद्धि दातार । ध्यान धरत ही होत नर दुःख सागर से पार ॥

     भक्तन को सन्तोष दे सन्तोषी तव नाम ।
     कृपा करहु जगदम्ब अब आया तेरे धाम ॥

जय सन्तोषी मात अनूपम । शान्ति दायिनी रूप मनोरम ॥

सुन्दर वरण चतुर्भुज रूपा । वेश मनोहर ललित अनुपा ॥

श्वेताम्बर रूप मनहारी । माँ तुम्हारी छवि जग से न्यारी ॥

दिव्य स्वरूपा आयत लोचन । दर्शन से हो संकट मोचन ॥

जय गणेश की सुता भवानी । रिद्धि-सिद्धि की पुत्री ज्ञानी ॥

अगम अगोचर तुम्हरी माया । सब पर करो कृपा की छाया ॥

नाम अनेक तुम्हारे माता । अखिल विश्व है तुमको ध्याता ॥

तुमने रूप अनेकों धारे । को कहि सके चरित्र तुम्हारे ॥

धाम अनेक कहाँ तक कहिये । सुमिरन तब करके सुख लहिये ॥

विन्ध्याचल में विन्ध्यवासिनी । कोटेश्वर सरस्वती सुहासिनी ॥

कलकत्ते में तू ही काली । दुष्ट नाशिनी महाकराली ॥

सम्बल पुर बहुचरा कहाती । भक्तजनों का दुःख मिटाती ॥

ज्वाला जी में ज्वाला देवी । पूजत नित्य भक्त जन सेवी ॥

नगर बम्बई की महारानी । महा लक्श्मी तुम कल्याणी ॥

मदुरा में मीनाक्शी तुम हो । सुख दुख सबकी साक्शी तुम हो ॥

राजनगर में तुम जगदम्बे । बनी भद्रकाली तुम अम्बे ॥

पावागढ़ में दुर्गा माता । अखिल विश्व तेरा यश गाता ॥

काशी पुराधीश्वरी माता । अन्नपूर्णा नाम सुहाता ॥

सर्वानन्द करो कल्याणी । तुम्हीं शारदा अमृत वाणी ॥

तुम्हरी महिमा जल में थल में । दुःख दारिद्र सब मेटो पल में ॥

जेते ऋषि और मुनीशा । नारद देव और देवेशा । इस जगती के नर और नारी । ध्यान धरत हैं मात तुम्हारी ॥

जापर कृपा तुम्हारी होती । वह पाता भक्ति का मोती ॥

दुःख दारिद्र संकट मिट जाता । ध्यान तुम्हारा जो जन ध्याता ॥

जो जन तुम्हरी महिमा गावै । ध्यान तुम्हारा कर सुख पावै ॥

जो मन राखे शुद्ध भावना । ताकी पूरण करो कामना ॥

कुमति निवारि सुमति की दात्री । जयति जयति माता जगधात्री ॥

शुक्रवार का दिवस सुहावन । जो व्रत करे तुम्हारा पावन ॥

गुड़ छोले का भोग लगावै । कथा तुम्हारी सुने सुनावै ॥

विधिवत पूजा करे तुम्हारी । फिर प्रसाद पावे शुभकारी ॥

शक्ति-सामरथ हो जो धनको । दान-दक्शिणा दे विप्रन को ॥

वे जगती के नर औ नारी । मनवांछित फल पावें भारी ॥

जो जन शरण तुम्हारी जावे । सो निश्चय भव से तर जावे ॥

तुम्हरो ध्यान कुमारी ध्यावे । निश्चय मनवांछित वर पावै ॥

सधवा पूजा करे तुम्हारी । अमर सुहागिन हो वह नारी ॥

विधवा धर के ध्यान तुम्हारा । भवसागर से उतरे पारा ॥

जयति जयति जय सन्कट हरणी । विघ्न विनाशन मंगल करनी ॥

हम पर संकट है अति भारी । वेगि खबर लो मात हमारी ॥

निशिदिन ध्यान तुम्हारो ध्याता । देह भक्ति वर हम को माता ॥

यह चालीसा जो नित गावे । सो भवसागर से तर जावे ॥

      श्री सन्तोषी माता की आरती

जय सन्तोषी माता, मैया जय सन्तोषी माता । अपने सेवक जन की सुख् सम्पति दाता । मैया जय सन्तोषी माता ।

सुन्दर चीर सुनहरी माँ धारण कीन्हो, मैया माँ धारण कीन्हो हीरा पन्ना दमके तन शृंगार कीन्हो, मैया जय सन्तोषी माता ।

गेरू लाल छटा छबि बदन कमल सोहे, मैया बदन कमल सोहे मंद हँसत करुणामयि त्रिभुवन मन मोहे, मैया जय सन्तोषी माता ।

स्वर्ण सिंहासन बैठी चँवर डुले प्यारे, मैया चँवर डुले प्यारे धूप् दीप मधु मेवा, भोज धरे न्यारे, मैया जय सन्तोषी माता ।

गुड़ और चना परम प्रिय ता में संतोष कियो, मैया ता में सन्तोष कियो संतोषी कहलाई भक्तन विभव दियो, मैया जय सन्तोषी माता ।

शुक्रवार प्रिय मानत आज दिवस सो ही, मैया आज दिवस सो ही भक्त मंडली छाई कथा सुनत मो ही, मैया जय सन्तोषी माता ।

मंदिर जग मग ज्योति मंगल ध्वनि छाई, मैया मंगल ध्वनि छाई बिनय करें हम सेवक चरनन सिर नाई, मैया जय सन्तोषी माता ।

भक्ति भावमय पूजा अंगीकृत कीजै, मैया अंगीकृत कीजै जो मन बसे हमारे इच्छित फल दीजै, मैया जय सन्तोषी माता ।

दुखी दरिद्री रोगी संकट मुक्त किये, मैया संकट मुक्त किये बहु धन धान्य भरे घर सुख सौभाग्य दिये, मैया जय सन्तोषी माता ।

ध्यान धरे जो तेरा वाँछित फल पायो, मनवाँछित फल पायो पूजा कथा श्रवण कर घर आनन्द आयो, मैया जय सन्तोषी माता ।

चरण गहे की लज्जा रखियो जगदम्बे, मैया रखियो जगदम्बे संकट तू ही निवारे दयामयी अम्बे, मैया जय सन्तोषी माता ।

सन्तोषी माता की आरती जो कोई जन गावे, मैया जो कोई जन गावे ऋद्धि सिद्धि सुख सम्पति जी भर के पावे, मैया जय सन्तोषी माता ।

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